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Success Story IAS Lalit: अंधा होने के बावजूद नहीं मानी हार, अपने सपनों की रोशनी से ऐसे बना IAS टॉपर

SUCESS STORY OF IAS TOPPER LALIT : सफलता पाने के लिए कभी कोई बहाना काम नहीं आता आपको कामयाबी अपके मेहनत के बल पर ही मिलती है, और उसी हिसाब से फल भी मिलता है। कई बार जब हमको सफलता नही मिलती तो हम बहाने बनाना शुरु कर देते है, या अपनी कुछ कमीयों के बल पर फायदा उठाने लगते है। अगर आपका सपना सच्चा है और आपके हौसले बुलंद है तो आपका कोई भी सपना अपकी किसी भी कमी के वजह से अधुरा नही रहेगा । दरअसल कमी सभी में होती है लेकिन ये हम पर अधारित है की हम अपनी उस कमी को किस तरह से अपने ताकत में बदल सकते हैं। क्योंकि सपने देखना आसान है लेकिन उन सपनों पर काम करना और हकिकत में तबदील करना उतना ही मुश्किल।

ललित का सपना और संघर्ष : सपनें पूरे करने के लिए एक सच्चा सपना चाहिए, फिर आपकी कोई भी कमी अपको नही रोक सकती, लेकिन आपकी वही कमजोरी आपकी ताकत बन जाती है। आईएएस टोर्पर ललित को देखले की दिक्कत है। इसके बावाजूद उन्होंने हार नही मानी, ललित ने पीएच श्रेणी में साल 2018 में यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास की और साल 2019 बैच के आईएएस बने। अपनी सफलता का पूरा श्रेय ललित अपने माता-पिता को देते हैं कियोंकि अंखे काम ना करने का बावजूद भी ललित आज इस मुकाम पर है और कदम-कदम पर उनके माता-पिता ने उनको पूरा सपोर्ट किया है। ललित बताते है कि आज वो जो भी है आपने परिवार वालों के वजह से ही हैं।

ललित को जन्म से नहीं थी समस्या :
कई बार आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक किमत चूकानी होती है वो चाहे धन से हो धर्म से हो या अपने शरीर से, ललित ने अपने सफलता की किमत कई साल पहले चूका दि थी जब वो पहली कक्षा में थे। दरअलस ललित को जन्म से ये दिक्कत नहीं थी। जब वो पहली कक्षा में आए तब उनको देखने में थोड़ी तकलिफ होने लगी, जिस वजह से परिक्षा के दोरान वो खुद से अपनी परिक्षा के पेपर भी नही लिख पाते थे। क्लास 8 से उन्होंने स्क्राइब लेना आरंभ कर दिया, इस तकलीफ का पता चलने पर उनके परिवार वालों ने काफी साहस दिखाया और हिम्मत नहीं हारी।

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UPSC के समय मां का मिला काफी सपोर्ट :
यूपीएससी की तैयारी के समय ललित को बहुत समस्याएं आयी। पहले तो पढ़ने का मैटीरियल नहीं मिलता था, और फिर जैसे-तैसे ललित ऑडियो बुक्स अरेंज करते थे। ललित के कठीन समय में उनकी मां ने काफी समझदारी दिखाई, उनकी मां 8 से 9 घंटे लगातार ललित के लिए प्रश्न पढ़ती थी और तय समय में ललित उन प्रश्नों का जवाब देते थे और फिर उनकी मां उन प्रश्नों के उत्तर भी बताती थी। एक माइने से ये भी कहा जा सकता है की ललित की इस सफलता के पिछे उनकी मां का काफी सपोर्ट रहा है। ललित की मां ने एक मां के फर्ज के साथ एक दोस्त और गुरु के रोल भी अदा किया है।

ललित की सलाह :
अंत में ललित यही कहते हैं कि जीवन में अगर गोल और नियत साफ हो तो कुछ भी कठिन नहीं। फिजिकल डिसएबिलिटी कुछ नहीं होती और उन जैसे डिसएबल लोग उन नॉर्मल लोगों से कहीं बेहतर हैं, जिनके जीवन में न कोई लक्ष्य होता है न उसे पाने की जद्दोजहेद। मन में ठान लें तो कोई भी चुनौती आपके हौसले को नहीं डिगा सकती और आप मंजिल तक जरूर पहुंचते हैं।

 

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