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Success story Mark Zuckerberg: जानें कैसे 22 साल की उम्र में सोशल नेटवर्किंग साइट बनाकर युवाओं के रोल मॉडल बने मार्क

नई दिल्ली: दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो बहुत छोटी सी उम्र काफी कुछ बड़ा सोचने लगते हैं। फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग इन लोगों में से एक हैं। मार्क महज 23 साल के उम्र में अरबपतियों में शुमार हो गए थे। मार्क का सॉफ्टवेयर के प्रति जुनून का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के लिए मैसेजिंग प्रोग्राम (मैसेंजर) बना दिया था। जिसका नाम बाद में जकनेट रखा गया।

मार्क का जन्म 14 मई 1984 में न्यूयॉर्क के यहूदी परिवार में हुआ था। मार्क के पिता पेशे से डॉक्टर थे और उनकी मां एक मनोचिकित्सक थी। उनके माता पिता सहित तीन बहनें हैं, मार्क उनमें से तीसरे नंबर पर हैं। मार्क शुरुआत से ही काफी तेज-तर्रार और होनहार लड़कों में से एक थे। जुकरबर्ग ने अपने हॅास्टल के कमरे से ही फेसबुक का निर्माण किया था। इसके लिए मार्क को अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। आज वो दुनिया के मशहूर एंटरप्रेन्योर हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 89 अरब से भी ज्यादा है।

मार्क ने 13 साल की उम्र में अपने पिता के लिए जो सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाया था, उसके जरिए व​ह अपने अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट और घर पर बात करते थे। बाद में मार्क ने इस नए नाम जकनेट रख दिया। मार्क के पिता ने इस काबिलियत को देखते हुए उन्हें कम्प्यूटर की शिक्षा देने का मन बनाया। मार्क के शिक्षक प्रोग्रामिंग में बढ़ती रुचि को देखकर हैरान थे। उनके शिक्षक कहते हैं कि जिस उम्र में बच्चे खेलकूद में ज्यादा मन लगाते हैं, वहीं मार्क दोस्तों के लिए वीडियो गेम बनाने पर काम करने लगे थे।

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हार्वर्ड का दौर
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद ही मार्क को आगे पढ़ाई के लिए हार्वर्ड में दाखिला कराया गया। वहां वे अपनी काबिलियत के दम पर बहुत तेजी से सुर्खियों में आ गए थे। मार्क में सीखने कि इतनी लनक थी कि फेसबुक बनाने से पहले, उन्होंने अपने कॉलेज के दोस्तों के लिए फेसमास नाम के नई वेबसाइट बनाई थी।

फेसमास के जरिए दो व्यक्तियों की सुंदरता की तुलना की जा सकती थी। फेसमास बनाने के लिए मार्क ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डेटाबेस को हैक कर और वहां की सभी लड़कियों की प्रोफाइल पिक चुराकर अपनी साइट के लिए प्रयोग किया था।

लेकिन इस नई वेबसाइट से कॉलेज में काफी विवाद हो गया। स्टूडेंट्स का मानना था कि इस तरह फोटो अपलोड करना उनकी पर्सनल लाइफ में दखलअंदाजी करने के बराबर है। लेकिन मार्क ने हिम्मत नहीं हारी और फेसमास के यूजर्स की संख्या करीब 10 लाख तक पहुंच गई। इस नई वेबसाइट के बनाने के बाद मार्क सुर्खियों में आ गए और उनको नए नाम ” सॉफ्टवेयर डवलपर” के नाम से जाना जाने लगा।

फेसमास्क बनाने के बाद ही मार्क की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि हार्वर्ड के सीनियर छात्र उनसे नई-नई आइडिया लेने आते थे। फेसमास्क बनाने से पहले ही हार्वर्ड के छात्र दिव्य नरेंद्र मार्क ने सोशल नेटवर्किंग साइट का आइडिया को लेकर मार्क से बातचीत की। दिव्य नरेंद्र ने मार्क  से कहा कि वह अपने कॉलेज के दोस्तों के लिए नई साइट बनना चाहते हैं। जिसका नाम वो ”हार्वर्ड” रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा की इस साइट के माध्यम से अपने फोटो और जानकारियां शेयर कर सकते हैं।

इस प्रस्ताव को सुनते ही मार्क ने हां कर दी और अपने मित्र के साथ मिलकर 2004 में ”द फेसबुक” नाम से नई वेबसाइट बनाई। जिस पर यूजर्स अपना फोटो और प्रोफाइल बना सकते हैं, मार्क की कामयाबी का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 2004 के अंत तक फेसबुक के यूजर्स 1 मिलियन से भी ज्यादा हो गई।  

मार्क का नेट-वर्थ
एक नए डेटा के अनुसार मार्क की कुल संपत्ती 5,560 करोड़ यूएस डॅालर है। हालांकि कोराना महामारी के चलते मार्क जुकरबर्ग को 3 अरब डालर यानी की 21,000 करोड़ रूपये का नकुसान उठाना पड़ा है। इससे पहले सन् 2005 में वेंचर कैपिटल एक्सेल पार्टनर ने 12.7 मिलियन डॉलर फेसबुक नेटवर्क में निवेश किए थे।

सक्सेस का मूलमंत्र

कामयाब होना आजकल हर किसी का ख्वाब होता हैं। आजकल हर कोई कमयाब होने का चाहत रखता है, लेकिन कामयाबी आसानी से नहीं मिलती। इसके लिए कड़ी मेहनत के साथ सही योजना भी होना जरूरी है। मार्क कहते हैं ”सबसे बड़ा रिस्क कोई रिस्क ना लेना है…इस दुनिया में जो सबकुछ बदल रहा है, केवल एक रणनीति जिसका फेल होना तय है, वो है रिस्क ना लेना।

मार्क कहते हैं कि बिजनेस एक टीम स्पोर्ट है, जिसके सफल होने के लिए आपको अपने स्टाफ की जरूरत होती है। एक अच्छा लीडर वही होता है, जो अपनी टीम के साथ काम करता है। जरूरत पड़ने पर उनको बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। अगर आप एक अच्छा लीडर बनना चाहते हैं तो आपको अपने स्टाफ से जुड़ी रहना
आना चाहिए। बिजेनस को सफलता दिलाने के लिए आपको अहम निर्णय लेना होता है। अगर आप एक अच्छे लीडर बनना चाहते है तो आप में डिसिजन मेंकिग की काबिलियत होनी चाहिए।

भारत से मार्क का नाता
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मार्क ने अपने बुरे वक्त के बारे में खुलासा किया कि कैसे उन्होंने अपने बुरे वक्त में भारत की यात्रा की थी। मार्क ने कहा कि जब उनकी कंपनी बिकने के कगार पर आ गई थी, तब एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॅाब्स ने उन्होंने भारत में एक मंदिर का दौरा करने के लिए कहा। यह मंदिर नैनीताल का कैंचीधाम आश्रम है। 2008 में एक महीने की यात्रा के बाद मार्क फेसबुक को फिर से अपने बिजनेस को खड़ा करने का मौका मिला। मार्क मानते हैं कि भारत की यात्रा के बाद उनके भीतर फेसबुक को अरबों में तब्दील करने का भरोसा मिला।

मार्क के रोल मॉडल
ज्यादातर लोगों के रोल मॅाडल सफल व्यक्ति होते हैं। मार्क एप्पल के पूर्व सीइओ स्टीव जॅाब्स को अपना रोल मॉडल  मानते हैं। मार्क मानते हैं कि स्टीव में सपनों का पीछा करते हुए गिरने का जोखिम, न हारने का डर और बाधाओं या अवरोधों के बावजूद जुनून का पीछा करना जैसी खूबियां थीं।

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